Thursday, September 30, 2010

ताकत वतन की हमसे है

संतों और पीरों की शेखावाटी धरा सदा से हिन्दू मुस्लिम एकता व सौहार्द्र की प्रतीक रही है | बात चाहे त्यौहारों की करें या फिर आस्था केन्द्रों की, गंगा - जमुनी संस्कृति यहाँ कायम रही है | ईद व दीवाली में एक दुसरे को बढ़ाई देने की होड़ लगी रहती है तो आस्था केन्द्रों में भी सांप्रदायिक सौहार्द्र की अनूठी मिसाल है | यहाँ के चप्पे चप्पे पर अपनायत की इबादत लिखी है | मानवता यहाँ का सबसे बड़ा धर्म और सेवा सबसे बड़ी बंदगी है | हर धर्म के अनुयायी यहाँ पानी में घुले रंगों की मानिंद एक दुसरे से मिले हैं | इसका धरती का जर्रा जर्रा अपने आप में बेमिसाल है |  झुंझुनू जिले के पिलानी कस्बे में स्थित नरहड़ दरगाह में प्रति वर्ष जन्माष्टमी पर लगने वाले उर्स के मेले में हिन्दुओं की संख्या मुसलामानों से अधिक रहती है | अस्थामय सालासर धाम का निर्माण भी मुस्लिम कारीगरों के हाथों से हुआ है | सौहार्द्र और विश्वास  की यह अनूठी डोर राव शेखाजी के समय से ही चली आ रही है जिसका निर्वहन अभी भी बदस्तूर हो रहा है | ऐसे ही कुछ तथ्य पाठकों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है -
  • विश्व प्रशिद्ध खाटू  श्याम मंदिर के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं क़ि मंदिर से मात्र 75 मीटर की दूरी पर शाह आलमगीर मस्जिद और शिव मंदिर एक ही दीवार से सटे हैं | दोनों स्थलों पर धर्मावलम्बी   सद्भाव के साथ अराधना और इबादत करते हैं | चाहे ईद का मौक़ा हो या महाशिवरात्रि जैसा पर्व, सभी आयोजनों में हिन्दू और मुस्लिम एक साथ कंधे से कंधा मिला कर शरीक होते हैं |
  • सीकर के दूजोद गेट के पास स्थित श्याम मंदिर में असगर चौहान पिछले 11 सालों से भक्तों की सेवा कर रहे हैं | खाटू  पदयात्रा में जाने वाले यात्रियों में शायद ही कोई ऐसा होगा जो उन्हें शक्ल से ना जानता हो   |
  • झुंझुनू के काना पहाड़ की तलहटी में स्थित हजरत कमरुद्दीन शाह की दरगाह मजहबी भाई चारे की अनूठी मिसाल है | यहाँ फरवरी में लगने वाले उर्स में सभी धर्मों के लोग शिरकत करते हैं |
  • चूरू के साहवा के गुरुद्वारे में सभी धर्मों के लोग भेद भाव भुलाकर लाखों की तादाद में एकत्रित होकर  मत्था टेकते हैं |
  • सीकर में नजीर खान चौहान ऩे 40 सालों तक  सीकर सांस्कृतिक मंडल के कार्यकर्ता के रूप में  रामलीला के मंचन सहित अन्य हिन्दू पर्वों पर होने वाले आयोजनों की कमान संभाली और उन्हें बखूबी सफल बनाया है  |
  • नवलगढ़ के रामदेव जी के मंदिर में हिन्दू रामसा कहकर पूजा करते  हैं तो मुस्लिम पीर के नाम से मनौतियाँ मांगते हैं | यहाँ हर साल करीब पाँच लाख श्रुद्धालु शीश झुकाते हैं |
  • चिडावा के पास नरहड़ की दरगाह में जन्माष्टमी पर लगने वाला मेला हिन्दू मुस्लिम एकता का जीवंत प्रमाण है |
  • खाटू में बाबा श्याम का रथ पिछले चालीस सालों से खुदाबक्स खां तेली सजा रहे हैं | 82 वर्षीय खुदाबक्स रथयात्रा के लिए ख़ास अलीगढ़ से मुस्लिम कारीगर बुलाकर अपनी देख रेख में रथ तैयार कराते हैं |  

Wednesday, September 29, 2010

उर्स में भजन - हस्ती मिटती नहीं हमारी


हजरत ख्वाजा हाजी मोहम्मद नजमुद्दीन की ऐतिहासिक दरगाह के सालाना उर्स में मंगलवार को चादर का जुलूस निकाला गया।  जौहर की नमाज के बाद चेजारों के मोहल्ले से जुलूस निकाला गया। ऊंट, घोड़ा व बैंडबाजे के साथ शाही लवाजमे के साथ निकाले गए जुलूस में मुख्य चादर सहित आधा दर्जन अन्य चादर भी शमिल थी। जुलूस में  ख्वाजा की खिदमत में कव्वालियां पेश की गई तथा कलाकारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए जिससे जायरीन दाद देने पर मजबूर हो गए। कस्बे के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जुलूस दरगाह पहुंचा, जहां सज्जादानशीन एवं मुतव्वली पीर गुलाम नसीर ने बुलंद दरवाजे पर चादर ग्रहण की और बड़े अदब के साथ दरगाह पर चढ़ाई। हालांकि जुलूस में भारी मात्रा में पुलिस लवाजमा मौजूद था , लेकिन लोगों को यही कहते सुना गया क़ि इस सौहार्द्रपूर्ण माहौल में इतना भारी जाब्ता जरूर तनाव दिखाता है  | व्यापारियों व हिन्दू धर्मावलम्बियों ऩे भी जगह जगह जुलूस का इस्तकबाल किया | जुलूस में काबिल ए तारीफ कव्वालियों के साथ साथ श्रीराम और हनुमान जी के भजनों की कव्वाली के रूप में मनमोहक प्रस्तुतियां दी गयी | श्री लक्ष्मीनाथ  मंदिर के पास जब कव्वालों ऩे सूफी अंदाज में ' पाँव में घुँघरू बाँध के नाचे जपे राम की माला ' पेश किया तो ऐसा लगा जैसे सारी सृष्टि मंत्रमुग्ध हो थम गयी है और भजनों का रसास्वादन कर रही है |   

उल्लेखनीय है क़ि कस्बे में हर प्रकार के धार्मिक आयोजनों में हर सम्प्रदाय की बराबर की भागीदारी रहती है | आज जब सारा देश अयोध्या मामले  के फैसले पर किसी अनिष्ट की आशंका से त्रस्त है, ऐसे माहौल में राजस्थान के छोटे से कस्बे के इस प्रकार के आयोजन सारे देश के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं | फतेहपुर कस्बा भले ही भारत के मानचित्र पर छोटा सा स्थान रखता है लेकिन इस प्रकार के आयोजन बता देते है क़ि क्यों आज भी राजस्थान भारत माता के सर का सरताज है और क्यों सारे देश को अपनी इस अनुपम थाती पर नाज है | विकसित और महानगर कहे जाने वाले शहरों के वर्तमान माहौल को देख कर ऐसा लगता है क़ि अगर यही विकास है  तो हम पिछड़े ही भले | महानगरीय संस्कृति में आज जहां आपसी प्रेम और सौहार्द्र  लुप्त हो गए हैं वहीं ग्रामीण परिवेश में आज भी सभी धार्मिक आयोजन एक पारिवारिक उत्सव की भांति मनाये जाते हैं | सारे देश में अयोध्या में मंदिर बनने की प्रार्थना में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ किये जाते हैं,  मस्जिद बनने  की आमीन में सजदे किये जाते हैं  लेकिन यहाँ   मंदिरों की आरती में बजती सैकड़ों घंटियाँ और अल्लाह  की इबादत में  उठे हजारों हाथ यही दुआ मांगते हैं क़ि हमारा भाई चारा और प्रेम यूं ही बना रहे,  इसे किसी की नजर ना लगे  | आपणों फतेहपुर परिवार भी परवर दिगार से यही दुआ माँगता है क़ि यहाँ का अमन  चैन बरकरार रहे और हम गुजरे कल की तरह आने वाले कल में भी कह सकें 
      मिस्त्र  रोमाँ यूनान मिट गए जहां से 
कुछ बात है क़ि हस्ती मिटती नहीं हमारी 

Monday, September 27, 2010

यह कैसा विश्व पर्यटन दिवस ?

विश्व पर्यटन दिवस से ठीक एक दिन पहले रविवार को सीकर में चांदपोल गेट के पास स्थित पुरावैभव की मिसाल रही बुर्ज की बलि दे दी गई। शहर में 11 बुर्ज में से छह पहले ही तोड़े जा चुके हैं। बुर्ज से सटे मकान के मालिक गिरजाशंकर जालान ने बताया कि राव राजा द्वारा यह बुर्ज उनके पूर्वजों को सौंपा गया था। तब से उनका परिवार बुर्ज की सार-संभाल कर रहा है। शनिवार को नगर परिषद की ओर से इस बुर्ज को तोड़ने के संबंध में एक नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में जनहित में यातायात व्यवस्था के लिए इस बुर्ज को तोड़े जाने का हवाला देते हुए २४ घंटे में इससे कब्जा हटाने के लिए कहा गया था। रविवार सुबह करीब सात बजे नगर परिषद के दस्ते ने जेसीबी मशीन से इस बुर्ज को तोड़ना शुरू कर दिया। दोपहर तक बुर्ज को तोड़ दिया गया। 

राव राजा भैरोंसिंह के शासन में विक्रम संवत् 1907   से 1923 के बीच शहर में तीन दरवाजों (चांदपोल, सूरजपोल व नया दूजोद गेट) का निर्माण करवाया गया था। इसके साथ ही दो बुर्ज बनाए गए थे। बुर्ज में गोला-बारूद रखते थे। बुर्ज से सैनिक तोप के साथ निगरानी किया करते थे। शहर के परकोटे से 11 बुर्ज लगते थे। शहर में नानीगेट, बाबुजी की हवेली, दीनदयाल की हवेली व दीवान मार्केट का ही बुर्ज निशानी बतौर बचा है | शहर पहले एक परकोटे के भीतर था। सुरक्षा की दृष्टि से परकोटे के चारों तरफ बुर्ज बनाए गए थे, जहां चौकीदार पहरा देते थे। धीरे-धीरे शहर का परकोटे से बाहर विस्तार होता गया, लेकिन ये बुर्ज आज भी अपने पुरावैभव की दास्तां बयां कर रहे हैं। 

नगर परिषद के अमले ने रविवार सुबह चांदपोल के पास कारीगरों के मोहल्ले में स्थित 150 साल पुराने ऐतिहासिक बुर्ज को ढहा दिया। इस धरोहर को तोड़ने के पीछे नगर परिषद प्रशासन यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए रास्ता चौड़ा करने का तर्क दे रहा है। इधर, नगर परिषद आयुक्त मदनकुमार शर्मा का कहना है कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए इस रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है। बुर्ज बीच में आ रहा था, इसलिए इसे तोड़ा गया है।

Friday, September 24, 2010

श्रीनगर से ठंडा शेखावाटी

शेखावाटी में पिछले दो दिन चली अविराम बारिश नी गुलाबी ठंडक का एहसास बढ़ा दिया है | चूरू स्थित मौसम केंद्र और फतेहपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में दर्ज २४ घंटे के तापमान में सामान्य से 10 डिग्री की गिरावट दर्ज की गयी है | दिलचस्प बात यह है क़ि फतेहपुर का तापमान यहाँ के स्थानीय मौसम केन्द्रों के अनुसार देहरादून से पाँच  एवं श्रीनगर से तीन  डिग्री  नीचे रहा है | वहीं अगर राज्य भर के तापमान से तुलना करें तो कोटा, बाड़मेर, उदयपुर और अजमेर से करीब आठ डिग्री सेल्सियस तक का फर्क है |          यहाँ का अधिकतम तापमान 24.5  डिग्री व न्यूनतम तापमान २४ डिग्री रिकार्ड किया गया है जबकि श्रीनगर में अधिकतम 27.2 व न्यूनतम 15.8 तथा देहरादून में यही क्रमशः 29.6  एवं 23.1 रिकार्ड किया गया है | उल्लेखनीय है क़ि शेखावाटी में इन दिनों सामान्यतया अधिकतम तापमान 35 व न्यूनतम तापमान २७ रहता है, जिसमें करीब दस डिग्री तक की गिरावट आई है मौसम विभाग के अनुसार अभी दो दिन तक और बादल छाए रहेंगे तथा बारिश की संभावना रहेगी | हालांकि ठण्ड एक साथ नहीं बढ़ेगी लेकिन हल्की गुलाबी ठण्ड बनी रहने की संभावना है |            

नहीं खुले ताले

सेठ जीआर चमडिय़ा पीजी कॉलेज में गुरुवार को चौथे दिन भी छात्रों की हड़ताल जारी रही। कॉलेज प्रशासन द्वारा चार व्याख्याताओं के निलंबन के बाद छात्रो ने हड़ताल कर दी तथा कॉलेज को ताला लगा दिया। कॉलेज प्रशासन के अनुरोध पर गुरुवार को पुलिस ने ताला खुलवाया। 

आक्रोशित छात्रों ऩे कालेज प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए बेवजह प्राध्यापकों को हटाने का आरोप लगाया पुलिस की उपस्थिति में कॉलेज प्रशासन और छात्र नेताओं की हुई बातचीत बेनतीजा रही तथा गतिरोध बना हुआ है। छात्रों के एक गुट द्वारा हड़ताल का विरोध  करने से तनाव भी बना हुआ है।  बाद में छात्रों ऩे एसडीएम को अपनी  मांगों का ज्ञापन सौंपा तथा समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की |

दरगाह में उर्स का आगाज

ऐतिहासिक हजरत नजमुद्दीन सुलेमानी चिश्ती की दरगाह पर गुरुवार को सज्जादानशीन पीर गुलाम नसीर द्वारा दरगाह के बुलंद दरवाजे पर अस्र की नमाज के बाद झंडा फहराकर उर्स का आगाज किया गया। इस अवसर पर अनेक जायरीन उपस्थित थे। सज्जादानशीन ने बताया कि उर्स के झंडे बरसों से नफासत अहमद सिराजी जोधपुर द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। गुरुवार अद्र्धरात्रि को कुल की रस्म अदा की गई। दरगाह के पीर गुलाम नसीर ऩे बताया हजरत ख्वाजा हाजी नजमुद्दीन सुलेमानी चिश्ती अलफारुकी का सालाना उर्स आगामी बुधवार तक चलेगा। उर्स में २४ से २८ सितंबर तक प्रतिदिन अनेक कार्यक्रम होंगे। इसमें शनिवार को मुशायरा होगा। इसके अलावा प्रतिदिन  कुरआनख्वानी, महफिले कव्वाली, वाजो मिलाद आदि कार्यक्रम भी होंगे। उर्स में चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर, जोधपुर, मकराना, डीडवाना, कुचामन, अहमदाबाद आदि स्थानों से अनेक जायरीन भाग लेने पहुंचे। दरगाह के बाहर उर्स में मेले जैसा माहौल है। विशाल झूले, मौत का कु आं व स्टालें आदि लगाई गई हैं |
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Thursday, September 23, 2010

भगवान पाश्र्र्वनाथ की रथयात्रा निकाली

अनंत चतुर्दशी पर जैन दिगंबर समाज द्वारा बुधवार को भगवान श्री पाश्र्र्वनाथ की शोभायात्रा निकाली गई। जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष प्रमोद जैन ने बताया कि श्री दिगंबर जैन मंदिर में दस दिन से चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों का समापन हुआ। दिन में नए जैन मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और भगवान बासुपूज्य के मोक्ष कल्याण के अवसर पर निर्वाण लड्डू चढ़ाए गए। दोपहर में पूजन के बाद भगवान श्री पाश्र्र्वनाथ की रजत रथयात्रा ऐरावत हाथी, धूपदान, पांडुकशिला सहित शाही लवाजमे के साथ निकाली गई जो कस्बेे के प्रमुख मार्गों से होती हुई बड़ा बाजार स्थित जैन मंदिर पहुंची। रथयात्रा में रथ में बैठने का सौभाग्य नेमीचंद लील्हा को मिला। सारथी की डाक शंकर कोतवाल, माला का सौभाग्य धर्मचंद बडज़ात्या, घोड़े पर बैठने का सौभाग्य विश्वनाथ सरावगी को मिला।  जैन समाज के अनेक गणमान्य लोग शोभा यात्रा में उपस्थित थे। जैन समाज ने अनंत चतुर्दशी पर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे |