Tuesday, April 12, 2016

564 साल का हुआ फतेहपुर

फतेहपुरकस्बे का 565वां स्थापना दिवस सोमवार को है। इसे चौहान राजा मोटे राव के पड़पौत्र नवाब फतेह खां ने बसाया था। कायमखानी शासक नवाब फतेह खां ने संवत 1505 में फतेहपुर किले की नींव रखी थी। उन्होंने चैत्र शुक्ला पंचमी संवत 1508 को गढ़ में प्रवेश किया था और 23 वर्ष तक फतेहपुर पर शासन किया। चैत्र शुक्ला पंचमी 1508 से चैत्र शुक्ला प्रतिपदा संवत 1788 तक 279 वर्ष 11 माह और 25 दिनों तक 12 नवाबी शासकों का राज रहा। इसके बाद चैत्र शुक्ला प्रतिपदा संवत 1788 को राव राज शिवसिंह ने तत्कालीन नवाबी शासक को परास्त कर फतेहपुर पर अाधिपत्य जमाया, तब से संवत 2011 तक 10 राजपूत शासकों ने 226 वर्ष तक शासन किया।
कस्बे में लोग केवल दो छतरियों को जानते हैं, जगन्नाथ सिंहानिया की छतरी और दूसरी रामगोपाल गनेड़ीवाल की छतरी, लेकिन इसके अलावा भी छोटी-छतरियां हैं। लोगों को उनकी जानकारी नहीं है। उनके नाम है रुकमानंद की छतरी (त्रिभुवन स्कूल), धाभाई की छतरी (कृष्ण सत्संग), नेवटिया की छतरी (शीतला स्कूल के पास) खेमका छतरी (गैस गोदाम के पास)। 
कस्बे में होटल हवेली के सामने घड़वा जोहड़ा और बीड़ में रामगोपाल गनेड़ीवाल का जोहड़ा है। इसके अलावा बांकिया बालाजी के पास जोहड़ा, मुसानिया जोहड़ा (कृषि गोदाम के पास), एनएच 52 पर पिंजरापोल में छोटी जोहड़ी, मंडावा रोड पर कसेरा बीड़ में भी जोहड़ा है, लेकिन लोगों को जानकारी नहीं है। 


फतेहपुर के संस्थापक नवाब फतेह खां ने फतेहपुर के अतिरिक्त अपने शासनकाल में चार गढ़ और बनाए थे। उनमें पल्लू, साहवा, भादरा भारण (बायला) हैं। 
नवाब दौलत खां संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने दौलत विनोद सार ग्रंथ लिखा था। 
सेठजीआर चमड़िया काॅलेज के गीता हाॅल में संगरमर के पत्थरोंं पर संपूर्ण गीता लिखी हुई है 
फतेहपुर में सर्वप्रथम रेल चैत्र बदी 14 संवत 1995 में सीकर से फतेहपुर तक चली थी। संवत 2011 में रेल चूरू तक पहुंची थी। संवत 1983 में रेलवे स्टेशन से मुकुंदगढ़ तक बस चली थी। 
पहला रेडियो सेट सेठ श्रीगोपाल नेवटिया संवत 1985 में लाए थे। 
दूसरे नवाब जलाल खां ने पशुधन विकास के लिए 12 कोस का बीड़ छोड़ा था। यह बीड़ राज्य में सबसे बड़ा है। 
संवत 1663 में दादूदासजी के शिष्य प्रयागदास ने फतेहपुर में दादू द्वारे की स्थापना की थी। संत सुंदरदास ने इसे ही अपनी तपोभूमि बनाया। 
फतेहपुर में सबसे पहला पुस्तकालय 200 वर्ष पूर्व संत बुधगिरीजी ने बुधगिरीजी की मढ़ी पर बनाया था। जीवित समाधि लेने से पूर्व उन्होंने सभी पुस्तकें श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर में पहुंचा दी थी। 


फतेहपुर कस्बा हवेलियों, बावड़ी, कुओं और भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। कभी 15 साल में कस्बे से 50 से अधिक हवेलियों को तोड़कर व्यावसायिक काॅम्पलेक्स बना दिए। सबसे अधिक हवेलियां बावड़ी गेट, संकड़ी गली, सीकरिया चौरास्ता, मुख्य बाजार में टूटी हैं। बावड़ी गेट पर नाभली वालों, सरावगियों की हवेली, जालान हवेली, अर्जुनदास गोयनका हवेली, छपरावाले सरावगियों की हवेली, सुखानंद सरावगी की हवेली, केडिया हवेली, जैन हवेली, रंगलाल सरावगी की हवेली, फतेहचंदका की हवेली, पोदार हवेली, सीताराम केडिया की हवेली को भूमाफिया ने नष्ट कर दिया। 

दादूसंप्रदाय के दूसरे सबसे बड़े संत सुंदरदास की समाधि बदहाल स्थिति में है। वे महान साहित्यकार थे और उन्हें साहित्य का शंकराचार्य भी कहा जाता है। उन्होंने अनेक अद्‌भुत रचनाएं लिखी। उनकी स्मृति में भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया था। पूरे देश में सुंदरदास ने पांच स्तंभ स्थापित किए थे, जिनमें फतेहपुर सबसे प्रमुख था। 

कस्बेकी सबसे अनमोल विरासत लाल पत्थरों की हवेली इसके स्वामियों की उपेक्षा से पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और इसका नामोनिशान भी नहीं बचा है। लाल पत्थरों पर बेहद बारीक कारीगरी से यह देशी-विदेशी सैलानियों का मन मोह लेती थी। सभी देशी-विदेशी लेखकों की पुस्तकों में इसका स्थान सबसे पहले आता था। 

Saturday, April 9, 2016

विरासत महोत्सव में बिखरे रंग

घड़वा जोहड़ा में बुधवार को फाल्गुनी विरासत महोत्सव आयोजित किया गया। आयोेजक विरासत सरंक्षण संगठन ने बताया कि अध्यक्षता पूर्व विधायक बीएल भिंडा ने की। मुख्य अतिथि कलेक्टर एलएन सोनी थे। महोत्सव में कलाकारों ने फाल्गुनी गीतों की प्रस्तुतियां दी। आयोजन देर रात तक चला। बाबूलाल माली एंड कंपनी ने ढप और चंग पर प्रस्तुतियां दी। लोक कलाकार पूर्णमल ने लावणी सुनाई। अर्जुन शर्मा, विद्याधर भास्कर के रींगस के भैरूंजी नृत्य पर लोग झूम उठे। गोगामेड़ी के रामनाथ एंड कंपनी ने बीन और भपंग पर प्रस्तुति दी। विरासत महोत्सव मनाने का मुख्य उद्देश्य कस्बे की विशालकाय हवेलियों और इनमें समाहित भित्तिचित्रों, बावडी, मकबरा, जोहड़े सहित अन्य विरासतों को बचाना तथा आम आदमी में अपनी समृद्ध और वैभवशाली इतिहास के प्रति जागृति पैदा करना है। 

Friday, April 8, 2016

भारत माता की आरती से किया नव वर्ष का स्वागत

गोयनकामंदिर में भारत माता की आरती का आयोजन किया गया। भारत विकास परिषद द्वारा रविवार देर रात आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और बाबा सत्यनारायण मौर्य ने जीवंत चित्र बनाए। इस दौरान उन्होंने भारत माता, स्वामी विवेकानंद, महाराणा प्रताप के अलावा लोकदेवता बाबा बुधगिरीजी और अमृत नाथजी के चित्र बनाए। उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि आज यहां भारत माता की जय नहीं बोलने वालों का बोलबाला है और सरकार परोक्ष रूप से ऐसे लोगों का समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन सभ्यता और संस्कृति के लगातार गिरने का प्रमुख कारण आधुनिक तकनीकी है, जो विकृत रूप से भारतीय संस्कृति को पेश कर रहे हैं। 

Thursday, April 7, 2016

कृषि कालेज में हड़ताल समाप्त

कृषिकॉलेज में चल रही हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। बुधवार को एसएफआई राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आबिद हुसैन के सानिध्य में हड़ताली विद्यार्थियों की डीन डाॅ. झाबरमल ढाका से वार्ता हुई। इसमें विद्यार्थियों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। बुधवार को काॅलेज प्रशासन ने विद्यार्थियों को उनकी मांगों के संबंध में लिखित आश्वासन दिया।

Wednesday, April 6, 2016

अप्रैल में ही पारा 40 के करीब

शेखावाटीमें मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। पारे में बढ़ोतरी के साथ ही अभी से धूप की तेजी अखरने लगी है। पिछले सालों की तुलना में इस बार अप्रैल के शुरुआत में ही मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। अप्रैल के पहले सप्ताह में शनिवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री के करीब पहुंच गया था। 
मौसम विभाग के अनुसार नमी कम होने और धूप में तेजी के कारण मौसम बदल रहा है। अब लगातार तापमान में बढ़ोतरी होगी। पिछले तीन सालों की बात करे तो अप्रैल के आखिरी और मई के शुरुआत में पारा 38 से 41 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। लेकिन इस बार अप्रैल के पहले सप्ताह में ही पारा 39 डिग्री तक पहुंच चुका है। साल 2015 में चार अप्रैल को अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जबकि इस बार 6.4 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ पारा 36.6 डिग्री पहुंच गया। पिछले सालों की तुलना इस बार तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। फतेहपुर मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 36.6 न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। 

Sunday, April 3, 2016

रात्रि चौपाल का आयोजन

ग्रामपंचायत रोसावां में गुरुवार रात्रि चौपाल लगी। जिप सीईओ कैलाश नारायण मीणा की अध्यक्षता में आयोजित रात्रि चौपाल में आला अधिकारियों  ने भाग लिया। ग्रामीणों ने रोसावां में शराब ठेका हटाने की मांग की। थेथलिया में श्मशान भूमि कटान के मामले में मौके पर तहसीलदार को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए तथा सड़क ठीक करने की मांग की। रात्रि चौपाल मेंं अचानक स्थान बदलने का कई लाेगों ने विरोध किया। पहले चौपाल अटल सेवा केंद्र में होने की बात थी, लेकिन एेनवक्त पर स्थान दो किमी दूर राउमावि रोसावां में कर दिया गया। स्थान बदलने पर लोगों ने विरोध जताया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राउमावि का स्थान रोसावां और थेथिलयां के बीच रखा गया था। 

Saturday, April 2, 2016

सेडळ सेडळ शीतला ए माँ

नगर में गुरुवार को शीतलाष्टमी पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की। सेडळ माता से ठंडी नजर रखने की कामना की।  महिलाएंसुबह से ही थालियो में ठंडे व्यंजन राबड़ी, पुआ, पकोड़ी, दही आदि सजाकर शीतला माता मंदिर में पहुंच रही थी। लोगों ने उन पर ठंडी नजर रखने तथा परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। इसी परंपरा के तहत महिलाओं ने कुम्हार के घर के पास ही कहानी सुनी। वहीं कस्बे में होली के दूसरे दिन से शुरू हुए गौरी पूजन के सिलसिले में गुरुवार को शीतलाष्टमी से गणगौर पूजने वाली महिलाएं युवतियां कुम्हार के घर से पक्की गणगौर एवं घडूल्या मंगल गीतों के साथ लेकर आई। इस मौके पर शीतला माता के मंदिरों एवं घर-घर में माता की पूजा की गई। माता के चावल, राबड़ी, अंकुरित बाजरा का भोग लगाकर ठंडा प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं ने बास्योड़ा की कहानी सुनी।