ऐतिहासिकनवाबी बावड़ी पर युवाओं ने भारत का नक्शा बनाया। बावड़ी पर पठानकोट पर आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई तथा गुरुवार रात्रि कैंडल मार्च निकाला और भारत का नक्शा बनाकर देशभक्ति का संदेश दिया।
विरासतसंरक्षण समिति द्वारा शुक्रवार को ऐतिहासिक सिंघानिया छतरी पर सफाई कर श्रमदान किया गया। कस्बे की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने लिए उद्देश्य से समिति द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को पूर्व पालिकाध्यक्ष मधुसूदन भिंडा, पार्षद प्रदीप रिणवा, करण सिंह जाखड़, नरेंद्र पारीक ईश्वरराम आदि समिति सदस्यों ने श्रमदान किया।
प्रियंका ने बताया कि उन्होंने 19 अक्टूबर को इसरो में वैज्ञानिक के लिए इंटरव्यू दिया था। अब उनको वहां से नियुक्ति का ऑफर मिल गया है। 18 जनवरी तक उनको इसरो में ज्वाइन करना है। प्रियंका के पिता निरंजन सिंह मील भी सिविल इंजीनियर हैं। उनकी मां सरिता देवी रामसीसर के गांव के राजकीय स्कूल में अध्यापिका हैं।
प्रियंकाने दसवीं कक्षा में राजस्थान बोर्ड की मैरिट में पहला स्थान प्राप्त किया था। खास बात यह थी कि वे सीकर के मारू स्कूल में पढ़ाई कर रही थी और सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए ही मैरिट हासिल की थी। सीकर से ही उन्होंने 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद आईआईआईटी ग्वालियर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। बाद में उनका तेलंगाना में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हो गया। प्रियंका का कहना है कि कड़ी मेहनत और लगन के कारण वे इस मुकाम तक पहुंची हैं। इसरो में भी वे इसी मेहनत से काम करेगी।